यह लेख जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की आवश्यकता पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इस मांग को प्रमुखता से उठाया है और केंद्र सरकार से इस पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है, जबकि धारा 370 की वापसी की बात से बचते रहे हैं। लेख में भाजपा के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के संभावित गठजोड़ की अटकलों, केंद्र सरकार के दावों और क्षेत्रीय दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप पर भी चर्चा की गई है।
यह लेख 2024 में जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर केंद्रित है। इसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात, सुप्रीम कोर्ट के धारा 370 पर फैसले के बाद राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने के आदेश, और लद्दाख के राज्य व 6वीं अनुसूची के दर्जे की मांग पर प्रकाश डाला गया है। लेख बताता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में यह मुद्दा नहीं है, जबकि जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार और लद्दाख के लोग इस पर अड़े हैं।
यह लेख जम्मू व कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वापसी और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर केंद्रित है, जो इसके निरस्त होने के छह साल बाद भी जारी है। क्षेत्रीय दल और कांग्रेस केंद्र सरकार पर मानसून सत्र में राज्य का दर्जा बहाल करने वाला विधेयक लाने का दबाव बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार के टालमटोल रवैये पर सवाल उठाया है, जबकि उपराज्यपाल प्रशासन राजनीतिक गतिविधियों को दबाने और अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप है।
संघशासित क्षेत्र जम्मू व कश्मीर में विधान सभा सीटों के परिसीमन को लेकर गतिरोध बना हुआ है। परिसीमन आयोग के दूसरे मसौदा रिपोर्ट को भी नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी सहित कश्मीरी दलों ने अस्वीकार कर दिया है, उनका आरोप है कि यह जम्मू क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व देता है और कश्मीर घाटी को कम। दल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और राज्य का दर्जा बहाल होने के बाद ही चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव और फिर राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कह रही है।
लेख 'जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र' Jammu and Kashmir के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित है। जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र