जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र
लेख 'जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र' Jammu and Kashmir के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित है। जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र
पढ़ें →आधिकारिक डिजिटल अभिलेख
पत्रकार · लेखक · विचारक
शशिधर खान हिंदी पत्रकारिता, राजनीतिक विश्लेषण और समकालीन सामाजिक लेखन का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। हिंदी पत्रकारिता में वे संभवतः अकेले ऐसे लेखक हैं जो नागा संकट, नक्सल आंदोलन, उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर जैसे विषयों पर लगभग चालीस वर्षों से लगातार लेखन कर रहे हैं।
यह एक प्रगतिशील अभिलेखीय परियोजना है, जिसका उद्देश्य शशिधर खान के लेखन, पुस्तकों और सार्वजनिक जीवन से संबंधित उपलब्ध सामग्री को एक स्थान पर संकलित करना है। यह संग्रह निरंतर अद्यतन और विस्तार की प्रक्रिया में है।
अभिलेखीय पद्धति और स्रोत पढ़ें →
लेख 'जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र' Jammu and Kashmir के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित है। जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र
पढ़ें →लेख '‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रीय भावना को लेकर सियासी राजनीति' BJP और Politics, Parties & Democracy के संदर्भ में समसामयिक घटनाक्रम पर केंद्रित है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, अपितु भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह अमर मंत्र रहा है जिसने दासता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए करोड़ों देशवासियों में असीम ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया था।
पढ़ें →लेख मणिपुर में तीन वर्ष से अधिक समय से जारी जातीय हिंसा के बदलते तेवर, मेइतेइ-कुकी संघर्ष के बाद कुकी-नगा समुदायों के बीच नए सिरे से उभरे टकराव और परिसीमन-जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) अपडेट करने की मांग पर केंद्रित है। इसमें मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह की दिल्ली यात्रा, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना कार्य स्थगित किए जाने के फैसले, नगा-कुकी उग्रवादी गुटों की गतिविधियों और सर्वोच्च न्यायालय की शांति अपीलों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
पढ़ें →लेख तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी और शेख हसीना के समर्थन में उनके वक्तव्य को भारत-बांग्लादेश संबंधों के बदलते राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखता है। इसमें शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी, अवामी लीग की स्थिति, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव तथा समान नागरिक संहिता पर तस्लीमा के विचारों की चर्चा है। लेख तस्लीमा के निर्वासन और भारत में उनके राजनीतिक-सामाजिक स्वीकार और विरोध के पुराने प्रसंगों को भी वर्तमान घटनाक्रम से जोड़ता है।
पढ़ें →‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति की समय-सीमा बार-बार बढ़ने के बीच यह लेख राजनीतिक सहमति, संघीय ढांचे, राज्यों की मंजूरी, चुनाव आयोग के अधिकार और चुनावी लॉजिस्टिक्स की अड़चनों का विश्लेषण करता है।
पढ़ें →यह लेख पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस॰ वाई॰ कुरेशी की विवादास्पद सार्वजनिक यादों के बहाने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, संवैधानिक गरिमा, मतदाता सूची पुनरीक्षण, विपक्षी आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्तों के राजनीतिक विवादों की पड़ताल करता है।
पढ़ें →एनसीईआरटी की नई नौवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में इमर्जेंसी पर जोड़े गए नए अध्याय ने भाजपा और कांग्रेस के बीच संविधान के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर विवाद को और गहरा कर दिया है। लेख में 'संविधान हत्या दिवस' मनाए जाने की पृष्ठभूमि, संसद में हुई बहस, और स्कूली शिक्षा में इस सियासी एजेंडे के असर पर चर्चा की गई है।
पढ़ें →नरेंद्र मोदी के 12 साल के रिकार्ड प्रधानमंत्री कार्यकाल के जश्न के दिन ही नीट-यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हो गए। इससे 22.8 लाख छात्र प्रभावित हुए और देश भर से पांच से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली। यह लेख उपलब्धियों के बीच इस गंभीर संकट को उजागर करता है — परीक्षा प्रणाली की विफलता, एनटीए की भूमिका, साधारण परिवारों के बच्चों के टूटे सपने, और सरकार की असफल निगरानी को। साथ ही 2017 के एसएससी घोटाले से वर्तमान संकट तक की क्रमिक खामियों का विश्लेषण।
पढ़ें →